21 Swami vivekananda suvichar स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन

आज आप पढ़ेंगे स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन जो आपका जीवन पूर्ण रूप से बदलने का दम रखते हैं। Swami vivekananda suvichar and anmol vachan full of motivation and inspiration in hindi.

 

स्वामी विवेकानंद के अनमोल वचन – Swami Vivekananda Anmol vachan

Swami vivekananda quotes in Hindi with images
Swami vivekananda quotes in Hindi with images

उठो जागो और तब तक नहीं रुको  ,

जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो। ।

किसी भी लक्ष्य और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए तब तक प्रयत्न करना चाहिए जब तक उसको प्राप्त नहीं हो जाता।

 

किसी की निंदा न करें , अगर आप मदद के लिए
हाथ बढ़ा सकते है तो जरूर बढ़ाएं।
अगर नहीं बढ़ा सकते तो अपने हाथ जोड़िये ,
अपने भाइयों को आशीर्वाद दीजिये
और उन्हें उनके मार्ग पे जाने दीजिये। ।

किसी की निंदा करने से कोई लाभ नहीं जिसकी निंदा हम कर रहे है अंततः वह हमरा मित्र , शखा ,या भाई ही है ,उसकी निंदा स्वयं की निंदा के समान है।

आप उसकी सहायता कर सकते है तो कीजिये अन्यथा उसके सफलता की कामना कीजिये और अपना आशीर्वाद दीजिये।

 

ब्रम्हांड की सभी शक्तियां हमारे अंदर है ,
यह हम ही है जिन्होंने अपनी आँखों के सामने
हाथ रखा है और रोते हुए कहा कि अँधेरा है। ।

एक बालक का जन्म सभी शक्तियों के साथ होता है ,

किन्तु बालक समय और अपने ज्ञान के माध्यम से उसको धीरे – धीरे पहचान पता है।

इसी प्रकार जब एक व्यक्ति असफलता का रोना रोता है तो स्वयं को धोखा देता है,

क्योंकि सभी सफलता का मार्ग उसके परिश्रम और उसके समर्पण , लगन से होकर जाता है।

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जब कोई विचार अनन्य रूप से मस्तिष्क पर अधिकार कर लेता है
तब वह वास्तविक भौतिक या मानसिक अवस्था में परिवर्तित हो जाता है। ।

जब कोई व्यक्ति एक विचार या भाव को अपने मष्तिष्क में धारण कर लेता है.

और अनेको प्रयास के वावजूद भी उससे मुक्ति नहीं पता इस अवस्था में उस व्यक्ति का मस्तिष्क भौतिक या संसारिक माया में जकड जाता है।

 

Swami Vivekananda quotes in hindi

 

सच को कहने के हज़ारों तरीके हो सकते है
और फिर भी सच तो वही रहता है। ।

सच को बदला नहीं जा सकता चाहे कितने ही प्रकार से बात को प्रकट या कहा जाए किन्तु सत्य के मूल में कभी बदलाव नहीं आता।

 

Swami vivekananda suvichar anmol vachan
Swami vivekananda suvichar anmol vachan

 

जितना हम दूसरों के साथ अच्छा करते हैं
उतना ही हमारा ह्रदय पवित्र हो जाता है
और भगवान उसमे बसता है।

एक सच्चे ह्रदय में ही ईश्वर का वास होता है ,

और ह्रदय सच्चा तभी हो सकता है जब तुम निष्कपट हो छल से रहित हो।

ऐसा तभी हो सकता है जब तुम दुसरो के साथ अच्छा व्यवहार करोगे ,

जरूरतमदों के साथ मित्रता का व्यवहार करोगे ।

 

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यदि स्वयं में विश्वास करना , और अधिक विस्तार से
पढ़ाया और अभ्यास कराया गया होता ,
तो मुझे यकीन है कि बुराइयों और
दुःख का एक बड़ा हिस्सा गायब हो जायेगा। । 

आज लोगों में आत्मविश्वास की कमी देखने को मिलती है क्योकि

उनमे आत्मविश्वास की कमी है जिसके कारण वह जल्दी हार मानकर बैठ जाते है या अपनी जीवनलीला समाप्त कर लेते है।

अगर खुद पर भरोसा और आत्मविश्वास का पाठ पढ़ाया जाइये तो समाज से बुराइओं का बड़ा हिस्सा अपने आप समाप्त हो जायेगा।

 

पवित्रता , धैर्य और दृढ़ता
ये तीनो सफलता के लिए
आवश्यक है
और सबसे ऊपर प्यार है। ।

सफलता सभी लोगों को नहीं मिलती इसके लिए साधना की होती है और साधना तभी पूरी होती है जब मन पवित्र हो ,

धैर्य भरपूर मात्रा में हो और प्यार की मूर्ति हो अन्यथा साधना कभी पूरी नहीं हो सकती।

 

Swami Vivekananda suvichar

Below you will read swami vivekananda ke suvichar in hindi.

क्या तुम नहीं अनुभव करते कि दुसरो के ऊपर निर्भर रहना बुद्धिमानी नहीं है।
बुद्धिमान व्यक्ति को अपने ही पैरों पर दृढ़ता पूर्वक खड़ा होकर कार्य करना चाहिए।
धीरे धीरे सब ठीक हो जायेगा।

कोई भी कार्य की सफलता थी है जब स्वयं पर पूर्ण विस्वास हो ,

विणा आत्म विश्वास के कोई भी कार्य पूर्ण नहीं हो सकता।

दुसरो पर विश्वास करके तो कभी कोई कार्य पूर्ण नहीं हुआ जरुरत है अपने पर विश्वास का।

अगर आप स्वयं पर विश्वास करेंगे तो आपका कार्य शानदार तरीके से पूर्ण होंगे।

 

 

 

अन्धविश्वास मनुष्य का बड़ा शत्रु है
लेकिन धर्मान्धता उससे भी बुरा है। । 

मनुष्य का बड़ा शत्रु स्वयं उसका अन्धविश्वास है ,

जो उसके मार्ग को रोकता है और सच्ची राह से भटकता है जिसके कारण वह कभी भी सचाई तक नहीं पंहुच पाता।

यह मार्ग उसे अंधविश्वासी बनाता है ,

इस अन्धविश्वास को सिद्ध करने के लिए धर्म से जोड़ कर धर्मान्धता की और ले जाया जाता है।

 

 

जब तक आप स्वयं पर विश्वास नहीं करते
तब तक आप भगवान पर विश्वास नहीं कर सकते। ।

किसी पर विश्वास करने से पूर्व व्यक्ति को स्वयं पर विश्वास करना चाहिए।

बिना स्वयं पर विश्वास किए कोई किसी अन्य पर विश्वास नहीं कर सकता स्वयं भगवान पर भी नहीं।

दुनिया में आज भी विश्वास और भरोसा कायम है ,

बिना इसके जीवन निरस प्रतीत होता है ,

विश्वास ही वह कड़ी है जो माता पिता से पुत्र को जोड़ती है।

 

Anmol vachan in hindi

 

एक अच्छे चरित्र का निर्माण
हजारों ठोकरें खाने के बाद ही होता है। ।

चरित्र का निर्माण करना कोई आसान कार्य नहीं है।

चरित्र का निर्माण हजारों ठोकरें खाने के बाद ही होती है ,

ठोकरों से हमारा आशय मेहनत अनुभव और श्रम से है।

अच्छे चरित्र के लिए व्यक्ति को अपना जीवन तपस्वी की भांति व्यतीत करनी पड़ती है ,

तब जाकर एक अच्छे चरित्र का निर्माण हो पाता है.

 

 

जीवन में ज्यादा रिश्ते होना जरुरी नहीं है
पर जो रिश्ते है उनमे जीवन होना जरुरी है। ।

किसी भी चीज की अधिकता सदैव वर्जित होता है ,

यह रिश्तो पर भी नियम लागू है।

ज्यादा रिश्ते होना भी कभी – कभी कठिनाई मुसीबत साबित होती है।

इसलिए जीवन में ज्यादा रिश्ते होना कोई मायने नहीं रहता ,

पर जो रिश्ता हो वह अविश्वसनीय और टिकाऊ हो यह जरूरी होता है।

 

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