वीर सावरकर के अनमोल वचन हिंदी में (veer savarkar quotes)

स्वाधीनता संग्राम में अनेकों ऐसे वीर सपूतों ने अपनी मातृभूमि के लिए श्रेष्ठ बलिदान दिया। कुछ ऐसे बलिदानी भी हुए जो गुमनामी के पन्नों में खो गए, वीर सावरकर ने अपने मातृभूमि को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद करवाने के लिए संघर्ष किया। उन्होंने अंग्रेजो के द्वारा यातनाएं सही किंतु हिम्मत नहीं छोड़ी। आज भारतवासी स्वतंत्र, स्वच्छंद वातावरण में सांस ले रहे हैं, यह वीर सावरकर जैसे महान पूजनीय क्रांतिकारियों की देन है। प्रस्तुत लेख में हम वीर सावरकर जी के अनमोल वचन पढ़ेंगे जो देश और हिंदुत्व आदि पर आधारित है।

veer savarkar quotes in hindi

राष्ट्रगीत में अपना सर्वस्व न्योछावर करने की भावना वीर सावरकर में थी उन्होंने बेहद कम उम्र में स्वाधीनता संग्राम के आंदोलन में सहभागिता दिखाई। समाज को एकजुट किया और गुलामी के खिलाफ आवाज बुलंद की। इस लेख में सावरकर जी से संबंधित सुविचार पढ़ेंगे।

1

देश हित में सर्वस्व त्याग की भावना

सच्ची देशभक्ति है, जिस व्यक्ति में

लालच की भावना होती है

वह देश हित में निर्णय नहीं ले सकता।

2

हम संघर्ष की तपती धरा से

बचने के लिए

शीतल युक्त मार्ग चुनते हैं

यही हमें पतन के मार्ग तक पहुंचाती है।

3

संघर्ष ही पुरुषार्थ की पहचान है

अपने पुरुषार्थ को कभी

कम मत होने दो

अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए

संघर्ष और पुरुषार्थ का वरण करो।

4

देश की खातिर जीना और देश की खातिर मरना

जिस व्यक्ति में नहीं है वह व्यक्ति मृत के समान है।

5

अगर तुम वास्तव में स्वतंत्र रहना चाहते हो

तो कोई तुम्हें गुलाम नहीं बना सकता

अपनी पहचान को कभी धूमिल मत करो।

6

संकल्प शक्ति के आधार पर

कठिन से कठिन लक्ष्य को भी

प्राप्त किया जा सकता है

इसलिए देशवासियों को

अपने संकल्प मजबूत रखने होगे।

7

क्षणभर रुको और शांत मन से विचार करो

तुम्हें क्या चाहिए?

फिर उसके प्रति दृढ़ प्रतिज्ञा हो

और अपने लक्ष्य की ओर बढ़ जाओ

देखो गुलामी की जंजीरें तुम्हें

अधिक देर तक नहीं बांधे रख सकती।

8

मात्र संकल्प से सब कार्य पुणे नहीं होते

उसके लिए तुम्हें समर भूमि में उतरना भी होगा

अपना सर्वश्रेष्ठ बलिदान देना भी होगा

सर्वस्व न्योछावर भी करना होगा

अपने पीढ़ी को भी

इस समर भूमि में खपाना होगा।

veer savarkar quotes on hindutva (सावरकर के सुविचार)

1

अपने धर्म से बड़ा कोई और

नहीं हो सकता

अपने धर्म की तुम रक्षा करो

धर्म तुम्हारा रक्षा करेगा।

2

हिंदू हमेशा सहनशील रहा है

किंतु जब-जब

सहनशीलता का परिचय हुआ

एक महा विनाश उत्पन्न हुआ।

3

हम विजेता बनने की चाहत नहीं रखते

हम तो सहिष्णु और सर्वधर्म की

भावना रखने वाले हैं

किंतु जब-जब धर्म की हानि होगी

तब तब धर्म युद्ध का उदय होगा।

4

जीवन एक धर्म युद्ध है

इस धर्म की रक्षा के लिए

हमें सर्वस्व न्योछावर करने की

भावना रखनी चाहिए।

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निष्कर्ष

उपरोक्त सुविचार को पढ़कर स्पष्ट होता है कि वीर सावरकर निश्चित रूप से वीर थे, उन्होंने स्वाधीनता संग्राम में बढ़ चढ़कर भाग लिया था। छोटी उम्र में ही वह स्वाधीनता संग्राम में शामिल हो गए थे और अंग्रेजों की कितनी की यातनाओं को उन्होंने सहन किया फिर भी उन्होंने मातृभूमि के लिए मरते दम तक संघर्ष किया।

आशा है उपरोक्त लेख आपको पसंद आया हो अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।

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