Parasnath Quotes in Hindi

पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर थे उनका आरंभिक जीवन राज सुख से परिपूर्ण था। जब उन्हें अपने जन्म के महत्व का ज्ञान हुआ तब उन्होंने अपना गृह त्याग कर कठोर तपस्या की। फलस्वरूप उन्हें ईश्वरीय ज्ञान प्राप्त हुआ। उन्होंने अहिंसा, तथा प्राणियों में सद्भाव की शिक्षा समाज को दी। पार्श्वनाथ में झारखंड के श्री सम्मेद शिखरजी पर अपना अंतिम समय व्यतीत किया। जैन धर्म के लिए यह पहाड़ी तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध है। प्रस्तुत लेख में आप पार्श्वनाथ भगवान के अनमोल वचन, सुविचार पढ़ेंगे जो जीवन को पवित्र तथा सद्गति प्रदान करने का कार्य करेगा।

Parasnath Quotes in Hindi (पार्श्वनाथ अनमोल वचन)

1.

हर एक प्राणी के प्रति

दया भाव रखना ही

मनुष्य का परम धर्म है।

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2.

लड़ना है तो स्वयं से लड़ो

बाहरी दुनिया पर विजय पाने में

कैसा आनंद?

आनंद स्वयं के इंद्रियों पर

विजय पाने का है, जय जिनेंद्र।

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3.

आपकी आत्मा से परे कोई भी शत्रु नहीं है

असली शत्रु आपके भीतर रहते हैं

वह शत्रु है क्रोध, घमंड

लालच आसक्ति और घृणा।

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4.

प्राणियों की सेवा मजबूत

इच्छाशक्ति के साथ ही संभव है

अन्यथा सेवा की भावना

समय-समय पर क्षीण होती रहती है।

5.

आपके द्वारा किए गए समय की बर्बादी

ईश्वर से साक्षात्कार में बाधा है।

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6.

मनुष्य जब अपने आत्मविश्वास के साथ

पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी के साथ

जीवन का निर्वाह करता है तो

ईश्वर की सच्ची भक्ति प्राप्त होती है।

7.

जब आप किसी से वादा करते हैं

तो उस वादे को पूर्ण संकल्प

तथा दृढ़ विश्वास के साथ पूर्ण कीजिए

यह आपके आत्मविश्वास को बढ़ाकर

आपके इंद्रियों पर विजय दिलाएगा।

8.

जीवन में दो ही मांग ईश्वर से करिए

माँ-बाप के बिना घर न हो

और कोई माँ-बाप बेघर न हो।

9.

जिस प्रकार आपको दुख पसंद नहीं है

उसी प्रकार अन्य लोगों को दुख पसंद नहीं

आप सबके साथ ऐसा व्यवहार करें

जो आप अपने लिए व्यवहार चाहते हैं।

10.

ज्ञानी व्यक्ति अपनी आत्मा की पहचान करता है

वास्तव में यही पहचान उसके परलोक का साथी है।

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समापन

जैन धर्म तथा उसको मानने वाले निश्चित रूप से महान कर्तव्य और निष्ठा का पालन करते हैं। उनके व्यवहार में विनम्रता तथा आचरण में सौम्यता झलकती है। वह किसी प्राणी को कष्ट देना ईश्वर को कष्ट देने के समान मानते हैं। उनका दैनिक जीवन भी अनुकरणीय है, सूर्यास्त से पूर्व भोजन ग्रहण करना जैसे छोटे-छोटे व्यवहार ही उनकी सादगी को दर्शाती है। वह किसी ऐसे व्यापार का साथ नहीं करते जिसमें दूसरों को कष्ट हो इसलिए इस धर्म के लोग अधिकतर व्यापारी, अकाउंटेंट जैसे प्रतिष्ठित पद पर कार्य करते हैं। यह पुलिस तथा अधिवक्ता जैसी नौकरी से थोड़ा परहेज करते हैं क्योंकि इससे प्राप्त होने वाले पैसे किसी न किसी प्रकार दुखी मन से प्राप्त होते हैं।

जैन धर्म के सभी तीर्थंकर व्यक्ति के जीवन और अध्यात्म के बीच के अंतर को समझाने का प्रयत्न करते रहे। भगवान पार्श्वनाथ ने भी अपने जीवन में यही कार्य किया उन्होंने अपने अनुयायियों के माध्यम से जन-जन तक मनुष्य जीवन के महत्व और उनके और परमात्मा के बीच के अंतर को समझाने का प्रयत्न किया। उनका परम उद्देश्य मोक्ष को प्राप्त करना तथा प्राणियों में सद्भावना स्थापित करना था। उपरोक्त लेख आपको कैसा लगा अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें।

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