Katyayani Quotes in Hindi माँ कात्यायनी के अनमोल वचन

कात्यायनी को अधिष्ठात्री देवी तथा महिषासुर मर्दिनी के नाम से भी जाना जाता है। ऋषि कात्यायन की घोर तपस्या के कारण माता ने कात्यायन के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया था, तबसे इनका नाम कात्यायनी पड़ा। माता की पूजा नवरात्रि के पावन दिनों में शुभ मानी जाती है। इनका चिंतन-मनन करने से सभी कष्ट तथा भय का अंत हो जाता है। इस लेख में आप माता कात्यायनी के अनमोल वचन, सुविचार का अध्ययन करेंगे और भक्ति लाभ प्राप्त करेंगे।

Maa Katyayani Quotes in Hindi

1

या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायानी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:

2

दुर्गति नाशिनी दुर्गा जय जय
काल विनाशिनी काली जय जय
उमा रमा ब्रह्म्णी जय जय
राधा सीता रुक्मिणि जय जय

3

कट जाते हैं भव-बाधा, जब मां आप प्रसन्न होती हैं

देती है वरदान भक्तों को, असुरों का संहार करती हैं।

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4

जो कोई सच्चे हृदय से मां कात्यायनी का ध्यान करता है

उसे अनोखी शक्ति प्राप्त होती है

वह हर इच्छा पर विजय प्राप्त करने का सामर्थ्य रखता है।

5

नवरात्रि के छठे दिन मां कात्यायनी

आपके घर विराजे

आपका घर सुख समृद्धि वैभव से परिपूर्ण हो

आपके घर सभी स्वस्थ रहें निरोगी रहें

ऐसी कामना के साथ आपको

नवरात्रि की हार्दिक शुभकामनाएं।

6

जब आप पवित्र मन से

अपने हृदय के भीतर

आस्था की बाती जलाते हैं तब आप

मां से साक्षात्कार कर पाते हैं।

7

चिंता भय परेशानी हताशा उन्ही को होती है

जो मां के दरबार तक नहीं पहुंच पाते।

सच्चे हृदय से बोलो मां कात्यायनी की जय।

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8

सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सवार्थ साधिके

शरण्येत्र्यंबके गौरी नारायणी नमोस्तुते।

9

ॐ जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी,

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु‍ते

10

प्रलय काल सब नासन हारी, तुम गौरी शिव शंकर प्यारी

शिव योगी तुम्हरे गुण गावे, ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावे।

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माता कात्यायनी से जुड़ी जानकारी

1 माता का नाम कात्यायनी क्यों पड़ा?

उत्तर- ऋषि कात्यायन ने माता को अपने घर बुलाने के लिए घोर तपस्या की थी। जिसके कारण माता प्रसन्न होकर ऋषि कात्यायन के घर पुत्री रूप में आई थी। ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण माता का नाम कात्यायनी पड़ा।

2 माता कात्यायनी को ब्रजभूमि की अधिष्ठात्री देवी क्यों कहा जाता है?

उत्तर- गोपियों ने श्री कृष्ण का प्रेम पाने के लिए माता कात्यायनी की पूजा की थी

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समापन

मां दुर्गा के छठे स्वरूप को कात्यायनी कहते हैं, इनका नाम ऋषि कात्यायन की पुत्री होने के कारण पड़ा। मां कात्यायनी की विधि विधान के साथ पूजा करने पर पुण्य प्राप्त होता है धन,समृद्धि, वैभव के साथ-साथ परिवार तथा स्वजनों की खुशहाली भी होती है। मां अपने भक्तों पर सदैव कृपा करती है। देवी माँ को मीठे भोग पसंद है मां को मधु से निर्मित भोग लगाने पर प्रसन्न किया जा सकता है। जिसका एक उदाहरण गोपियों के द्वारा मां कात्यायनी की पूजा के प्रसंग में देखने को मिलता है। जहां मधु से निर्मित व्यंजन का मां कात्यायनी को भोग लगाया गया था। इन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी कहा जाता है। मां की पूजा विधि विधान के साथ करने से जन्म जन्मांतर का पाप भी नष्ट हो जाता है। मां कात्यायनी को देवी पार्वती के नाम से भी जाना जाता है। उपरोक्त लेख आपको कैसा लगा? अपने सुझाव तथा विचार कमेंट बॉक्स में लिखें, जिससे हम अपने लेख में सुधार कर सकें।

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